आजकल देखा जा रहा है बड़े शहरों में साइकिल चलाने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है! प्रसंगवश हमारे बरगद के पेड़ के नीचे भी आज यही चर्चा हो रही है! संतोष हडबडाते हुए अपनी गाडी खड़ी कर सुभाष ओर देव से हाथ मिलाते हुए कहता है,”यार यह साइकिल वाले बड़े दुखी करने लगे [...]

 

अभी हाल ही में आप लोगों ने अजमल कसाब व् अन्य प्रकार के तथा-कथित आतंकवादियों के बारे में सुना और पढ़ा होगा! बहुत लोगों की तरह हमारे बरगद के पेड़ के नीचे बैठे राजीव और हमीद को भी उत्सुकता हुई यह जानने कि आखिर ऐसे घृणित कृत्यों के पीछे व्यक्तिगत मंशा क्या होती है! शायद ऐसे ही प्रश्न कचहरी में [...]

 

Many times day to day life leaves us overwhelmed with too many things to take care of. This situation is more pronounced with people who are in professions where they directly or indirectly come in contact with companies having business interests with the Technologically Advanced Countries where consumerism has gone really deep inside the people. [...]

 

प्रिय पाठकों हम लोग विभिन्न संचार माध्यमों से समाज में हो रही घटनाओं और परिवर्तनों को देखते, पढ़ते और सुनते हैं! बहुत बार हम लोग यह सब अनुभव कर निराश हो जाते हैं! यह ब्लॉग एक प्रयास है इन्ही सब में आशावादिता खोजने का! वस्तुतः उससे स्वयं व् पाठकों को लाभ पहुंचाने का भी उद्देश्य है! ब्लॉग का नाम वट [...]

 

दाढ़ी के गुण बहुत है .. सदा राखिये आप ! औरों की तो बात छोडिये .. थर्राते हैं बाप , थर्राते हैं बाप .. रौब भी बढ़ जाता है, साधू नेता चोर समझ में नहीं आता है ! – कृष्णा भैया

 

If I were little more beautiful.. If I were little more rich… If I had a better job… If I had the best man!! If I were the God… ..the world’s in my hold… If I could change the world… If everything goes by my plan… If I were little bold… n if I had [...]

 

How to expect kindness in this world, when it’s no longer there… the soft words , the soothing gestures , friends who said they care… Am I the only one who think this way… that the world’s a strange place to stay… it asks us a fortune to shell out… to live, be happy , [...]

 

संगीत की रूचि आपको कई चित्ताकर्षक व्यक्तित्वों से अवगत होने का अवसर देती है! ऐसे ही कुछ सौभाग्य मुझे मिले! उन्ही अनुभवों में से सबसे प्रिय: कृष्ण भइया ! उनके बारे में पाठकों को बता कर मैं अति गौरवान्वित और हर्षित अनुभव कर रहा हूँ!आपकी शुभकामनाओं से आशा है हमें कृष्ण भइया का संगीत सदभाव [...]

 

A story from “Living with the Himalayan Masters – Swami Rama” A master had a student who had never seen a cow nor tasted milk. But he knew that milk was nutritious. So he wanted to find a cow, milk it, and drink the milk. He went to his master and asked him, “Do you [...]

 

I guarantee you will remember the tale of the Wooden Bowl tomorrow, a week from now, a month from now, a year from now. A frail old man went to live with his son, daughter-in-law, and four-year old grandson. The old man’s hands trembled, his eyesight was blurred, and his step faltered. The family ate [...]

RSS बरगद का पेड़ – नवभारत ब्लोग्स

  • सीटी बजाने की सोच रहे हैं?
    "अरे नकुल, और तुम्हारी प्रबंधन शिक्षा कैसी चल रही है?" डॉक्टर मिश्रा ने बरगद के पेड़ के नीचे बैठे नकुल से पूछा! नकुल व्यंग्यपूर्ण आश्चर्य से मिश्र जी को देखते हुए बोला,"मैं समझा नहीं, यह कौनसी शिक्षा के बारे में बात कर रहे हैं आप! ऐसा तो मैं कुछ नहीं कर रहा!" मिश्र जी हँसते हुए बोले, "अरे मैं तुम्हारी मैनेजमेंट कॉलेज की पदाई के बारे […]
    पुनीत बिंद्लिश
  • क्या हम प्रयोग करने से डरने लगे हैं? भाग-2
    अभी संजीव, विपुल, आँचल और डॉक्टर कृष्णन वैज्ञानिक प्रवृति या साइंटिफिक ऐटिटूड से प्रयोग करने के लाभ-हानि के बारे में बात कर ही रहे थे कि देखा अपनी साइकिल पर डॉक्टर मिश्रा जी आ गए! संजीव हँसते हुए कहते हैं, "चलिए अब सुनते है प्रयोग पर मिश्रा जी क्या कहते हैं! इन्होंने भौतिकी ही नहीं बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी कई प्रयोग किए!" विपुल तुरंत बोला, […]
    पुनीत बिंद्लिश
  • क्या हम प्रयोग करने से डरने लगे हैं? भाग-1
    "और आँचल बेटे, परीक्षाएं हो गयी?” संजीव ने ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा आँचल से पूछा। आँचल ने मुहं लटका कर उत्तर दिया," हाँ, हो ही गई!" पास बैठे विपुल ने पूछा, "क्या बात है, परीक्षा अच्छी नहीं हुई क्या?" आँचल बोली, "नहीं, सभी ठीक रही, पर व्यावहारिक विज्ञान के कुछ प्रयोग प्रयोगशाला में करने थे, वे ठीक नहीं हुए! कहीं मुझे उसमे अनुतीर […]
    पुनीत बिंद्लिश
  • साइकिल वाले को कितनी जगह देते हैं आप?
    आजकल देखा जा रहा है कि बड़े शहरों में साइकिल चलाने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है! प्रसंगवश हमारे बरगद के पेड़ के नीचे भी आज यही चर्चा हो रही है! संतोष हड़बडाते हुए अपनी गाडी खड़ी कर सुभाष और देव से हाथ मिलाते हुए कहता है, "यार, यह साइकिल वाले बड़े दुखी करने लगे हैं। कभी भी गाड़ी के सामने आ जाते हैं, गाड़ी चलाते समय सारा ध्यान इनको बचाने की ओर ही […]
    पुनीत बिंद्लिश
  • कहीं आपका आधा सच पूरा झूठ तो नहीं?
    अभी हाल ही में आप लोगों ने अजमल कसाब व अन्य प्रकार के तथाकथित आतंकवादियों के बारे में सुना और पढ़ा होगा! बहुत लोगों की तरह हमारे बरगद के पेड़ के नीचे बैठे राजीव और हमीद को भी उत्सुकता हुई यह जानने कि आखिर ऐसे घृणित कृत्यों के पीछे व्यक्तिगत मंशा क्या होती है! शायद ऐसे ही प्रश्न कचहरी में न्यायाधीश ने भी कसाब का मुक़दमा सुनते समय किए होंगे! राजीव ने हमीद से पु […]
    पुनीत बिंद्लिश

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